स्थापना काल - एक छोटा सा दीप (2004)
जब हमने वर्ष 2004 में इस NGO की शुरुआत की थी, तब हमारे पास संसाधन सीमित थे, पर संकल्प असीम था। मात्र 5 गाँवों के 35 शिक्षार्थियों के साथ हमने शिक्षा सेवा का कार्य प्रारंभ किया। उस समय हमारा उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं था, बल्कि उन बच्चों में आत्मविश्वास, संस्कार और स्वावलंबन की भावना जगाना था जो शिक्षा की मुख्य धारा से वंचित थे। झोपड़ी में, पेड़ के नीचे, चौपाल पर जहाँ जगह मिली, वहीं कक्षा लगी।
शिक्षा के क्षेत्र में हमारे प्रमुख आयाम
- बुनियादी शिक्षा एवं साक्षरता: ग्रामीण अंचल के ऐसे बच्चे जो कभी स्कूल नहीं गए, उनके लिए बुनियादी साक्षरता अभियान, निःशुल्क पाठ्य-सामग्री, यूनिफॉर्म और छात्रवृत्ति की व्यवस्था।
- संस्कार युक्त शिक्षा: पंडित दीनदयाल उपाध्याय सरस्वती विद्या मंदिर के माध्यम से आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्य और राष्ट्रभक्ति की शिक्षा।
- बालिका शिक्षा पर विशेष जोर: "बेटी पढ़ेगी, तो गाँव बढ़ेगा" के नारे के साथ हमने 50 गाँवों में अभिभावकों को जागरूक कर सैकड़ों बालिकाओं को स्कूल से जोड़ा।
- डिजिटल एवं कौशल शिक्षा: आज के युग की आवश्यकता को देखते हुए कंप्यूटर शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यशालाओं का आयोजन।
आज की उपलब्धि - 2026 में एक वटवृक्ष
ईश्वर की कृपा, दानदाताओं के सहयोग और समर्पित कार्यकर्ताओं की निष्ठा से आज 2026 में वह 35 बच्चों का छोटा सा प्रयास एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है।
आज हम 50 से अधिक गाँवों में 1000+ शिक्षार्थियों तक प्रत्यक्ष रूप से शिक्षा की सेवा पहुँचा रहे हैं। हरदौलपुर रोड, चौडगरा, फतेहपुर स्थित हमारा विद्यालय इस सेवा का मुख्य केंद्र बन गया है, जहाँ से यह शिक्षा की गंगा 50 गाँवों तक प्रवाहित हो रही है।
यह केवल संख्या की वृद्धि नहीं है, यह 1000 परिवारों के भविष्य में उजाला है।
भविष्य का संकल्प
हमारा लक्ष्य अगले 5 वर्षों में 100 गाँवों और 2500 शिक्षार्थियों तक पहुँचना और एक पूर्ण आवासीय शिक्षा केंद्र की स्थापना करना है, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
दीनदयाल सेवा भारती केवल एक NGO नहीं, एक परिवार है, एक आंदोलन है।
सेवा ही शिक्षा है, शिक्षा ही राष्ट्र निर्माण है।
सौजन्य से : दीनदयाल सेवा भारती, फतेहपुर